Maah e Ramadan ki Fazilat in Hindi, Urdu | माह-ए-रमज़ान

अस्सलामु अलैकुम्, उम्मीद है के आप सभी खैरो आफियत से होंगे |आज हम आप को Maah e Ramadan ki Fazilat in Hindi, Urdu meबताने वाले हैं उम्मीद है आप इस पोस्ट को पढ़ कर दूसरों तक भी पहुॅचायेंगे।

रमज़ान अल-मुबारक का महीना मुसलमानों के लिए हक तआला शान की बहुत बड़ी इनायत है मगर जब ही के इस इनायत की क़दर भी की जाए। वर्ना हम से महरूमों के लिए एक महीना तक रमज़ान चलते जाने के सिवा कुछ भी नहीं।

Maah e Ramadan ki Fazilat

एक हदीस में है के अगर लोगों को ये मालूम हो जाए के रमज़ान क्या चीज़ है तो मेरी उम्मत ये तमन्ना करे के सारा साल रमज़ान ही हो जाए। हर शख़्स समझता है कि साल भर के रोज़े रखने का दर्द मगर रमज़ान अल-मुबारक के सवाब के मुक़ाबले में हज़रत का इरशाद है के कुछ लोग इस की तमन्ना करने लग जाएँ।

एक हदीस में इरशाद है के रमज़ान अल-मुबारक के रोज़े और हर महीने में तीन रोज़े रखना दिल की खूट और वसवसे को दूर करता है। आख़िर कोई तो बात है के सहाबा-ए-करम रमज़ान के महीने में जिहाद के सफ़र में बा-वज़ू नबी करीम ﷺ के बार-बार इफ्तार की इजाज़त फरमा देने के. रोजे का इहतिमाम फरमाते हैं, हत्ता के हजूर ﷺ को हुक्मन मना फरमान पड़ा।

मुस्लिम शरीफ की एक हदीस में है के सहाबा-ए-करम एक ग़ज़वाह के सफ़र में एक मंजिल पर उतरे, गर्मी निहायत सख्त थी और गुरबत की वजह से इस कदर कपड़ा भी सब के पास था कि धूप की गर्मी से बचाओ कर लें। बोहत से लोग अपने हाथ से आफताब की शुआ से बचने की कोशिश करते थे। इस हालात में भी बोहत से रोजेदार थे, जिनसे खरे होने का मकाम ना हुआ और गिर गए। सहाबा-ए-कराम की एक जमात गोया हमेशा तमाम साल रोज़ेदार ही रहती थी।

हजरत सलमान कहते हैं कि नबी करीम ﷺ ने शाबान की आखिरी तारीख में हम लोगों को वजीफ फरमाया के तुम्हारे ऊपर एक महीना आने वाला है जो बहुत बड़ा महीना है, बहुत मुबारक महीना है। इस में एक रात है (शब-ए-क़द्र) जो हज़ारों महीनो से बढ़ कर है। अल्लाह ताला ने इस के रोज़े को फ़र्ज़ फरमाया और इस के रात के क़ियाम, यानी तरावीह को सवाब की चीज़ बनाई है। जो शख़्स इस माहीने में किसी नेकी के साथ अल्लाह का क़ुर्ब हासिल करे, ऐसा है जैसा के ग़ैर रमज़ान में फ़र्ज़ अदा किया और जो शख़्स इस माहीने में किसी फ़र्ज को अदा करें, वो ऐसा है जैसे के ग़ैर रमज़ान में सत्रह फ़र्ज अदा करें |

ये महिना सब्र का है और सब्र का बदला जन्नत है और ये महिना लोगों के साथ ग़म-ख़्वारी का है। इस महीने में मोमिन का रिज़क बढ़या जाता है। जो शख़्स किसी रोज़दार को रोज़ा इफ्तार कराए उसके लिए गुनाहों की माफ़ी और आग से खलासी का सबाब होगा और रोज़दार के सवाब की मानिंद उस को सवाब होगा मगर उस रोज़दार के सवाब से कुछ कम नहीं किया जाएगा। सहाबा ने अर्ज़ किया के या रसूल अल्लाह! हम में से हर शख़्स तो इतनी वुस’अत नहीं रखता के रोज़दार को इफ्तार कराए। तो आप ने फरमाया के पेट भर खोलने पर मुकूफ़ नहीं, ये सवाब तो अल्लाह तआला एक ख़जूर से कोई इफ्तार करादे या एक घूंट पानी पीला दे या एक घूंट पानी पिलाए उस पर भी रहमत फरमा देते हैं।

ये ऐसा महीना है के इस का पहला हिसा अल्लाह की रहमत है और दरमियान हिसा मगफिरत है और आखिरी हिसा आग से आजादी है। जो शख़्स इस माहीने में हलका करदे अपने गुलाम ओ खादिम का बोझ हक ताला इस की माफ़ी फरमाता है और आग से आज़ादी फरमाता है। और चियर चीज़ों की इस में कसरत राखा करो जिन में से दो चीज़

अल्लाह तआला की रज़ा के वास्ते और दो चीज़ें ऐसी हैं जिनसे तुम चाराह कर नहीं सकते। पहली दो चीजें जिन से अपने रब को राजी करो वो कलिमा तय्यिबा और अस्तगफार की कसरत है। और दूसरी दो चीज़ें ये हैं कि जन्नत की तलब करो और आग से पनाह मांगो जो शख़्स किसी रोज़दार को पानी पिलाए हक़ तआला क़यामत के दिन मेरी हौद से हमें ऐसा पानी पिलाए गा जिस के बाद जन्नत में दाखील होने तक प्यास नहीं लगेगी.

Maah e Ramadan ki Fazilat

Maah e Ramadan ki Fazilat

رمضان المبارک کا مہینہ مسلمانوں کے لئے حق تعالی شانہ کا بہت ہی بڑا انعام ہے گر جب ہی کہ اس انعام کی قدر بھی کی جائے۔ ورنہ ہم سے محروموں کے لئے ایک مہینہ تک رمضان چلاتے جانے کے سوا کچھ بھی نہیں۔

ایک حدیث میں ہے کہ اگر لوگوں کو یہ معلوم ہو جائے کہ رمضان کیا چیز ہے تو میری امت یہ تمنا کرے کہ سارا سال رمضان ہی ہو جائے ہر شخص سمجھتا ہے کہ سال بھر کے روزے رکھنے کا درد مگر رمضان المبارک کے ثواب کے مقابلہ میں حضور کا ارشاد ہے کچھ لوگ اس کی تمنا کرنے لگیں ۔

ایک حدیث میں ارشاد ہے کہ رمضان المبارک کے روزے اور ہر مہینے میں تین روزے رکھنا دل کی کھوٹ اور وساوس کو دور کرتا ہے۔ آخر کوئی تو بات ہے کہ صحابہ کرام رمضان کےمہینے میں جہاد کے سفر می باوجو نبی کریم ﷺ کے بار بار افطار کی اجازت فرما دینے کے روزہ کا اہتمام فرماتے حتی کہ حضورﷺ کو حکماً منع فرمانا پڑا ۔

مسلم شریف کی ایک حدیث میں ہے کہ صحابہ کرام ایک غزوہ کے سفر میں ایک منزل پر اترے گرمی نہایت سخت تھی اور غربت کی وجہ سے اس قدر کپڑا بھی سب کے پاس تھا کہ دھوپ کی گرمی سے بچاؤ کر لیں بہت سے لوگ اپنے ہاتھ سے آفتاب کی شعاع سے بچتے سے کی سے بجھتے ۔ اس حالت میں بھی بہت سے روزے دار تھے جن سے کھڑے ہو سکنے کا محل نہ ہوا اور گرگئے صحابہ کرام کی ایک جماعت گویا ہمیشہ تمام سال روزے دار ہی رہتی تھی۔

حضرت سلمان کہتے ہیں کہ نبی کریم صلی اللہ علیہ وسلم نے شعبان کی آخر تاریخ میں ہم لوگوں کو وعظ فرمایا کہ تمہارے اوپر ایک مہینہ آرہا ہے جو بہت بڑا مہینہ ہے بہت مبارک مہینہ ہے۔ اس میں ایک رات ہے (شب قدر) جو ہزاروں مہینوںسے بڑھ کر ہے اللہ تعالیٰ نے اس کے روزہ کو فرض فرمایا اور اس کے رات کے قیام یعنی تراویح کو ثواب کی چیز بنایا ہے جو شخص اس مہینہ میں کسی نیکی کے ساتھ اللہ کا قرب حاصل کرے ایسا ہے جیسا کہ غیر رمضان میں فرض ادا کیا اور جو شخص اس مہینہ میں کسی فرض کو ادا کرے وہ ایسا ہے جیسا کہ غیر رمضان میں ستر فرض ادا کرے یہ مہینہ صبر کا ہے اور صبر کا بدلہ جنت ہے اور یہ مہینہ لوگوں کے ساتھ غم خواری کرنے کا ہے اس مہینہ میں مومن کا رزق بڑھا دیا جاتا ہے جو شخص کسی روزہ دار کا روزہ افطار کرا ئے اس کیلئے گناہوں کے معاف ہونے اور آگ سے خلاصی کا سبب ہوگا اور روزہ دار کے ثواب کی مانند اس کو ثواب ہوگا مگر اس روزہ دار کے ثواب سے کچھ کم نہیں کیا جائے گا صحابہ نے عرض کیا کہ یا رسول اللہ ہم میں سے ہر شخص تو اتنی وسعت نہیں رکھتا کہ روزہ دار کو افطار کرائے تو آپ نے فرمایا کہ پیٹ بھر کھلانے پر موقوف نہیں، یہ ثواب تو اللہ تعالیٰ ایک کجھور سے کوئی افطار کرادے یا ایک گھونٹ پانی پلا دے یا ایک گھونٹ پانی پلائے اسپر بھی مرحمت فرما دیتے ہیں۔ یہ ایسا مہینہ ہے کہ اس کا اول حصہ اللہ کی رحمت ہے اور درمیانی حصہ مغفرت ہے اور آخری حصہ آگ سے آزادی ہے جو شخص اس مہینہ میں ہلکا کر دے اپنےغلام و خادم کے بوجھ کو حق تعالی شانہ اس کی مغفرت فرماتا ہیں اور آگ سے آزادی فرماتا ہیں۔ اور چار چیزوں کی اس میں کثرت رکھا کرو جن میں سے دو چیزیں

اللہ تعالیٰ کی رضا کے واسطے اور دو چیزیں انیسی ہیں جن سے تمھیں چارہ کار نہیں پہلی دو چیزیں جن سے اپنے رب کو راضی کرو وہ کلمہ طیبہ اوراستغفار کی کثرت ہے۔ اور دوسری دو چیزیں یہ ہیں کہ جنت کی طلب کرو اور آگ سے پناہ مانگوجو شخص کسی روزہ دار کو پانی پلائے حق تعالی قیامت کے دن) میری حوض سے اس کو ایساپانی پلائیں گا جس کے بعد جنت میں داخل ہونے تک پیاس نہیں لگے گی۔

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