Wuzu ka Tarika | वुज़ू का तरीक़ा

अस्सलामु अलैकुम्, उम्मीद है के आप सभी खैरो आफियत से होंगे। आज हम आप को Wuzu ka Tarika | वुज़ू का तरीक़ा बताने वाले हैं उम्मीद है आप इस पोस्ट को पढ़ कर दूसरों तक भी पहुॅचायेंगे।


Wuzu ka Tarika | वुज़ू का तरीक़ा

का ‘बतुल्लाह शरीफ की तरफ मुंह कर के ऊंची जगह बैठना मुस्तहब है।

वुजू के लिये निय्यत करना सुन्नत है, निय्यत न हो तब भी वुजू हो जाएगा मगर सवाब नहीं मिलेगा। निय्यत दिल के इरादे को कहते हैं, दिल में निय्यत होते हुए ज़बान से भी कह लेना अफ्ज़ल है लिहाज़ा ज़बान से इस तरह निय्यत कीजिये कि मैं हुक्मे इलाही عَزَّوجل बजा लाने और पाकी हासिल करने के लिये वुज़ू कर रहा हूं। بِسْمِ ٱللَّٰهِ कह लीजिये कि येह भी सुन्नत है। बल्कि بسم اللهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ कह लीजिये कि जब तक बा वुजू रहेंगे फ़िरिश्ते नेकियां लिखते रहेंगे।’

अब दोनों हाथ तीन तीन बार पहुंचों तक धोइये, (नल बन्द कर के) दोनों हाथों की उंग्लियों का खिलाल भी कीजिये। कम अज़ कम तीन तीन बार दाएं बाएं ऊपर नीचे के दांतों में मिस्वाक कीजिये और हर बार मिस्वाक को धो लीजिये।

(हुज्जतुल इस्लाम हज़रते सय्यिदुना इमाम मुहम्मद बिन मुहम्मद बिन मुहम्मद गज़ाली عَلَيْهِ رَحْمَةُ اللَّهِ الْوَالِى फरमाते हैं: “मिस्वाक करते वक्त नमाज़ में कुरआने मजीद की किराअत और ज़िक्कुल्लाह عزَّ وجل के लिये मुंह पाक करने की निय्यत करनी चाहिये।”)

अब सीधे हाथ के तीन चुल्लू पानी से (हर बार नल बन्द कर के) इस तरह तीन कुल्लियां कीजिये कि हर बार मुंह के हर पुर्जे पर (हल्क के कनारे तक) पानी बह जाए, अगर रोज़ा न हो तो गर-ग़रा भी कर लीजिये । फिर सीधे ही हाथ के तीन चुल्लू (अब हर बार आधा चुल्लू पानी काफीहै ) से (हर बार नल बन्द कर के) तीन बार नाक में नर्म गोश्त तक पानी चढ़ाइये और अगर रोज़ा न हो तो नाक की जड़ तक पानी पहुंचाइये, अब (नल बन्द कर के) उलटे हाथ से नाक साफ़ कर लीजिये और छोटी उंगली नाक के सूराखों में डालिये।

तीन बार सारा चेहरा इस तरह धोइये कि जहां से आदतन सर के बाल उगना शुरू होते हैं वहां से ले कर ठोड़ी के नीचे तक और एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक हर जगह पानी बह जाए। अगर दाढ़ी है और एहराम बांधे हुए नहीं हैं तो (नल बन्द करने के बा’द) इस तरह खिलाल कीजिये कि उंग्लियों को गले की तरफ से दाखिल कर के सामने की तरफ निकालिये

फिर पहले सीधा हाथ उंग्लियों के सिरे से धोना शुरू कर के कोहनियों समेत तीन बार धोइये। इसी तरह फिर उलटा हाथ धो लीजिये। दोनों हाथ आधे बाजू तक धोना मुस्तहब है। अक्सर लोग चुल्लू में पानी ले कर पहुंचे से तीन बार छोड़ देते हैं कि कोहनी तक बहता चला जाता है इस तरह करने से कोहनी और कलाई की करवटों पर पानी न पहुंचने का अन्देशा है लिहाज़ा बयान कर्दा तरीके पर हाथ धोइये। अब चुल्लू भर कर कोहनी तक पानी बहाने की हाजत नहीं बल्कि (बिगैर इजाज़ते सहीहा ऐसा करना) येह पानी का इसराफ है

अब (नल बन्द कर के) सर का मस्ह इस तरह कीजिये कि दोनों अंगूठों और कलिमे की उंग्लियों को छोड़ कर दोनों हाथ की तीन तीन उंग्लियों के सिरे एक दूसरे से मिला लीजिये और पेशानी के बाल या खाल पर रख कर खींचते हुए गुद्दी तक इस तरह ले जाइये कि हथेलियां सर से जुदा रहें, फिर गुद्दी से हथेलियां खींचते हुए पेशानी तक ले आइये,’

कलिमे की उंग्लियां और अंगूठे इस दौरान सर पर बिल्कुल मस नहीं होने चाहिएं, फिर कलिमे की उंग्लियों से कानों की अन्दरूनी सत्ह का और अंगूठों से कानों की बाहरी सत्ह का मस्ह कीजिये और छुग्लियां (या’नी छोटी उंग्लियां) कानों के सूराखों में दाखिल कीजिये और उंग्लियों की पुश्त से गरदन के पिछले हिस्से का मस्ह कीजिये।

बा’ज़ लोग गले का और धुले हुए हाथों की कोहनियों और कलाइयों का मस्ह करते हैं येह सुन्नत नहीं है। सर का मस्ह करने से क़ब्ल टोंटी अच्छी तरह बन्द करने की आदत बना लीजिये बिला वज्ह नल खुला छोड़ देना या अधूरा बन्द करना कि पानी टपक कर जाएअ होता रहे इसराफ व गुनाह है।

पहले सीधा फिर उलटा पाउं हर बार उंग्लियों से शुरू कर के टख़नों के ऊपर तक बल्कि मुस्तहब है कि आधी पिंडली तक तीन तीन बार धो लीजिये। दोनों पाउं की उंग्लियों का खिलाल करना सुन्नत है। (खिलाल के दौरान नल बन्द रखिये) इस का मुस्तहब तरीका येह है कि उलटे हाथ की छुग्लिया से सीधे पाउं की छुग्लिया का खिलाल शुरूअ कर के अंगूठे पर ख़त्म कीजिये और उलटे ही हाथ की छंग्लिया से उलटे पाउं के अंगूठे से शुरू कर के छंग्लिया पर खत्म कर लीजिये । (आम्मए कुतुब)

(1 : सर पर मस्ह का एक तरीका येह भी तहरीर है इस में बिल खुसूस इस्लामी बहनों के • लिये ज़ियादा आसानी है चुनान्चे लिखा है मस्हे सर में अदाए सुन्नत को येह भी काफी • है कि उंग्लियां सर के अगले हिस्से पर रखे और हथेलियां सर की करवटों पर और हाथ • जमा कर गुद्दी तक खींचता ले जाए। (फ़्तावा र-ज़विय्या मुखरंजा, जि. 4. स. 621))

हुज्जतुल इस्लाम हज़रते सय्यिदुना इमाम मुहम्मद बिन मुहम्मदबिन मुहम्मद गज़ाली عَلَيْهِ رَحْمَةُ اللَّهِ الْوَالى फरमाते हैं: हर उज्व धोते वक़्त येह उम्मीद करता रहे कि मेरे इस उज्व के गुनाह निकल रहे हैं।


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