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Bukhar ki Dua | 8 बुखार के ईलाज की दुआ | Dua for Fever

अस्सलामु अलैकुम दोस्तों, क्या आपको भी बुखार बार बार लग जाता है? तो आज की पोस्ट में Bukhar ki Dua बताने वाले है। जिसको पढ़ने के बाद किसी भी तरह का बुखार हो, ठीक हो जायेगा।

दोस्तों बुखार आने की कोई वक़्त नहीं होता है, लेकिन इसको ठीक करने का वक़्त आपके पास जरुर है। इसीलिए आपको चाहिए की जब भी बुखार हो या बुखार की तरह महसूस हो तो बुखार उतारने की दुआ पढ़ ले।

नाज़रीन इस्लाम में बीमारी से शिफा की दुआ बहुत सारे है, जिसको पढ़ने के बाद और अल्लाह ता’अला पर तवक्कुल करने से हर बीमारी में शिफा जरुर मिलेगी। आज हम आपको 9 ऐसी दुआ बताएँगे जिसे पढ़ने के बाद इंशाअल्लाह आपको शिफा मिलेगी |


1. Bukhar ki Dua | Dua for Fever

بِسْمِ اللَّهِ الْكَبِيْرِ أَعُوذُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ مِنْ شَرِّ كُلِّ عِرْقٍ نَعَارٍ وَمِنْ شَرِّ حَرِّ النَّارِي
बिस्मिल्लाहिल-कबीर, अउधु बिल्लाही अल-अजीम मिन शरीरी कुल्ली ‘इरकिन नारिन, वा मिन शरीरी हैरी एन-नारी।
Bismillahil-Kabir, a’udhu billahi al-Azim min sharri kulli ‘irqin na’arin, wa min sharri harri an-nari.

तर्जुमा: अल्लाह का नाम ले कर शिफ़ा चाहता हूँ जो बड़ा है मैं अल्लाह की पनाह चाहता हूँ जो अज़ीम है जोश मारती हुई रग के शर से और आग की गर्मी के शर से

हवाला: मिशकात १५५४। तिरमिज़ी २०७५


2. Bukhar ki Dua | Dua for Fever

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ

اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ رَبِّ الْعٰلَمِیْنَ(1)
Alhamdu lillahi Rabbil ‘alamin.
الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْمِ(2)
Ar-Rahmani ar-Rahim.
مٰلِكِ یَوْمِ الدِّیْنِﭤ (3)
Maliki yawm ad-din.
اِیَّاكَ نَعْبُدُ وَ اِیَّاكَ نَسْتَعِیْنُﭤ(4)
Iyyaka na’budu wa iyyaka nasta’in.
اِهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِیْمَ(5)
Ihdinas-siratal mustaqim.
صِرَاطَ الَّذِیْنَ اَنْعَمْتَ عَلَیْهِمْ ﴰغَیْرِ الْمَغْضُوْبِ عَلَیْهِمْ وَ لَا الضَّآلِّیْنَ (6 )
Siratal-ladhina an’amta ‘alayhim ghayril maghdubi ‘alayhim wa la ad-dallin.

तर्जुमा

शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है. बहुत मेहरबान है।

तमाम तारीफें अल्लाह की हैं जो तमाम जहानों का परवरदिगार है (१) जो सब पर मेहरबान . बहुत मेहरबान है (२) जो रोज़े जज़ा का मालिक है (३) (ए अल्लाह) हम तेरी ही इबादत करते हैं. और तुझी से मदद मांगते हैं (४) हमें सीधे रास्ते की हिदायत अता फ़रमा (५) उन लोगों के रास्ते की जिन पर तु ने इनाम किया है (६) न कि उन लोगों के रास्ते की जिन पर ग़ज़ब नाज़िल हुआ है. और न उन के रास्ते की जो भटके हुए हैं

फ़ज़ीलत

हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ से मनकूल है: अलहम्द शरीफ़ चालीस बार पानी पर दम कर के बुख़ार वाले के मुँह पर छींटा दे, इंशा अल्लाह ताला बुख़ार दफ़ा हो जावे।


3. Bukhar ki Dua | Dua for Fever

إِنَّ الَّذِينَ اتَّقَوْا إِذَا مَسَّهُمْ طَئِفٌ مِّنَ الشَّيْطَنِ تَذَكَّرُوا فَإِذَا هُمْ مُّبْصِرُونَ
इन्ना अल्लाधिना इत्तकाव इधा मासहुम ताइफुन मिन अश-शैतानी तदक्करू फ़ा-इधा हम मुबसिरुन।
Inna alladhina ittaqaw idha massahum ta’ifun min ash-shaytani tadhakkaru fa-idha hum mubsirun.

तर्जुमा: जिन लोगों ने तक़्वा इख़तियार किया है, उन्हें जब शैतान की तरफ़ से कोई ख़्याल आकर छूता भी है तो वह (अल्लाह को) याद कर लेते हैं. चुनांचे अचानक उन की आँखें खुल जाती हैं (२०१)

फ़ज़ीलत: जिस शख़्स को गर्मी का बुख़ार आता हो इस आयत को पानी पर दम कर के या तश्तरी पर लिख कर पिलाए इंशा अल्लाह ताला शिफ़ा होगी।

हवाला: अल आराफ़ : २०१


4. Bukhar ki Dua | Dua for Fever

يُنَارُ كُونِي بَرْدًا وَ سَلَّمًا عَلَى إِبْرَاهِيمَ
यू नरू कुनी बरदान वा सलामन ‘अला इब्राहिम।
Yu naru kuni bardan wa salaman ‘ala Ibrahim.

तर्जुमा: ए आग ! ठंडी हो जा, और इबराहीम के लिए सलामती बन जा।

फ़ज़ीलत: जिस को गर्मी से बुख़ार आता हो इस आयत को लिख कर तावीज़ बना कर उस के गले में डाल दे इंशा अल्लाह ताला बुख़ार जाता रहेगा।

हवाला: अल अम्बिया : ६९


5. Bukhar ki Dua | Dua for Fever

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِ
बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम.
Bismillahir-Rahmanir-Rahim.

तर्जुमा: शुरू अल्लाह के नाम से जो सब पर मेहरबान है. बहुत मेहरबान है

फ़ज़ीलत

फ़क़ीह मोहम्मद माज़नी को बुख़ार हुवा, उन के उस्ताद फ़क़ीह वली अमर बिन सईद इयादत को आए और एक तावीज़ बुख़ार का देकर चले गए और ये फ़र्मा गए कि इस को देखना मत, ग़रज़ उस को बाँधा बुख़ार उसी वक़्त जाता रहा। इन्हों ने इस को खोल कर देखा तो बिसमिल्लाह लिखी थी, उन के एतिक़ाद में सुस्ती पैदा हुई, फ़ौरन फिर बुख़ार लौट आया, इन्हों ने जा कर शेख़ से अर्ज़ किया और अपने फेल से तौबा की, इन्हों ने और तावीज़ दे दिया और ख़ुद बांध दिया, फ़ौरन बुख़ार जाता रहा। इन्हों ने एक साल बाद इस को खोल कर देखा तो वही बिसमिल्लाह थी, उस वक़्त उन का एतिक़ाद पुख़्ता हुवा और अज़मत दिल में पैदा हुई।

हवाला: अल-कुरआन


6. Bukhar ki Dua | Dua for Fever

إِنَّ الَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُمْ مِنَّا الْحُسْنَى أولَئِكَ عَنْهَا مُبْعَدُونَ لَا يَسْمَعُوْنَ حَسِيْسَهَا وَهُمْ فِي مَا اشْتَهَتْ أَنْفُسُهُمْ خُلِدُونَ لَا يَحْزُنُهُمُ الْفَزَعُ الْأَكْبَرُ وَتَتَلَقَّهُمُ الْمَلَئِكَةُ هُذَايَوْمُكُمُ الَّذِي كُنْتُمْ تُوعَدُونَ
इन्ना अल्लादिना सबकत लहुम मिन्ना अल-हुस्ना उलाइका ‘अन्हा मुब’अदुन। ला यस्माउउना हसीसाहा वा हम फि मा इश्तहत अनफुसुहुम खुलिदुन। ला याहज़ुनुहुमु अल-फ़ज़ा’उ अल-अकबरू वा तातलक्काहुमु अल-मलाइकातु। हत्था यौमुकुमु अल्लधि कुन्तुम तु’अदुन।
Inna alladhina sabqat lahum minna al-husna ula’ika ‘anha mub’adun. La yasma’uuna haseesaha wa hum fi ma ishtahat anfusuhum khulidun. La yahzunuhumu al-faza’u al-akbaru wa tatalaqqahumu al-mala’ikatu. Hatha yawmukumu alladhi kuntum tu’adun.

तर्जुमा: (अलबत्ता) जिन लोगों के लिए हमारी तरफ़ से भलाई पहले से लिखी जा चुकी है, (यानी नेक मोमिन) उन को इस जहन्नम से दूर रखा जाएगा। (१०१) वह उस की सरसराहट भी नहीं सुनेंगे, और वह हमेशा हमेशा अपनी मन पसंद चीज़ों के दरमयान रहेंगे। (१०२) उन को वह (क़ियामत की) सब से बड़ी परेशानी ग़मगीन नहीं करेगी, और फ़रिश्ते उन का (ये कह कर) इस्तिक़बाल करेंगे (किः) ये तुम्हारा वह दिन है जिस का तुम से वादा किया जाता था। (१०३)

फ़ज़ीलत: बुख़ार और तमाम अमराज़ और दर्दों के लिए एक पाक बर्तन में सिहाइ से लिख कर आबे चाह से जिस पर धूप न आती हो, धो कर तीन घूँट मरीज़ को पिलाए और दर्द की शिद्दत के वक़्त बक़ीया उस की कमर पर छिड़क दे, तीन दिन इसी तरह करे, या रोगने बाबूना से धो कर दर्द कमर और ज़ानूँ के वास्ते मालिश करे।

हवाला: अल अम्बियाः १०१, १०२, १०३


7. Bukhar ki Dua | Dua for Fever

اكْشِفِ الْبَأْسَ ، رَبَّ النَّاسِ ، إِلهَ النَّاسِ
इक शिफ़ अल-बसा, रब्ब अन-नास, इलाहा अन-नास।
ik shif al-ba’sa, Rabb an-nas, ilaha an-nas.


8. Bukhar ki Dua | Dua for Fever

اللَّهُمَّ ارْحَمْ جِلْدِيَ الدَّقِيْقَ، وَعَظَيَ الرَّقِيقَ مِنْ شِدَّةِ الْحَرِيقِ يَا أُمِّ مِلْدَمِ إِنْ كُنْتِ آمَنْتِ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ فَلَا تَصَدَّعِي الرَّاسَ وَلَا تُنْتِنِيَ الْفَمَ وَلَا تَأْكِي اللَّحْمَ وَلَا تَشْرَبِي الدَّمَ وَتَخَوْلِي عَنِّي إِلَى مَنْ يَجْعَلُ مَعَ اللَّهِ الهَا آخَرَ
अल्लाहुम्मा इरहाम जिल्दिया अद-दक़िक़, वा ‘अधिया अर-रक़ीक़ मिन शिद्दति अल-हरिक़। या उम्मी मिलदामी इन कुंती अमंती बिलाही अल-‘अजीम, फला तसद्द’ई अर-रसा वा ला टुनटिनी अल-फामा वा ला ताकी अल-लाहमा वा ला तशरबी अद-दमा वा तखावली एनी इला मन याजल मा’ अल्लाही इलाहा अखाड़ा.
Allahumma irham jildiya ad-daqiq, wa ‘adhiya ar-raqiq min shiddati al-hariq. Ya ummi mildami in kunti amanti billahi al-‘azim, fala tasadda’i ar-rasa wa la tuntini al-fama wa la ta’ki al-lahma wa la tashrabi ad-dama wa takhawli anni ila man yaj’al ma’ Allahi ilaha akhara.


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